खोज - अस्तित्व की
मन में एक द्वंद्व था,बेचैनी थी,
भय था, हीन भावना और अनेक प्रश्न भी थे
नहीं मिला उसे संतुष्टिपूर्ण जवाब कहीं से,
इसीलिए उसे खुद की खोज में निकलना पड़ा..
खुद से बातें करते करते
शायद अब वो बाहरी बाते भूल चुका था,
खुद की तलाश करते करते वो अब
खुद कि गहराइयों में खो चुका था..
अपने आप से सवालात करते करते,
अपने आप को ही सलाहकार मानने लगा था
शायद उससे बेहतर उसे कोई समझ ना सकता था
इसीलिए खुद को खुद में ही खोजने लगा था..
बाहर से वो मुक सा प्रतीत होता था,
पर अपने आप से ढेरों बातें करता था
हा उसने अपने आप को खोज लिया था,
उसने पा लिया था एक शब्द - अनंत..!
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